सहारनपुर में ‘अंतर्मन की व्यथा’ का भव्य विमोचन, रामायण-महाभारत के उर्मिला, भरत और द्रौपदी की अनकही पीड़ा बनी काव्य का केंद्र

सहारनपुर के रामतीर्थ सभागार में आयोजित साहित्यिक समारोह में कवियत्री डॉ. रश्मि शर्मा की नई काव्य कृति ‘अंतर्मन की व्यथा’ का लोकार्पण गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलाधिपति, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतीहारी (बिहार) के डॉ. महेश शर्मा रहे, जिन्होंने पुस्तक का विमोचन करते हुए कवियत्री के संवेदनशील लेखन, कृतित्व और व्यक्तित्व की मुक्त कंठ से सराहना की। समारोह का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और वंदना के साथ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर डॉ. रश्मि शर्मा ने बताया कि ‘अंतर्मन की व्यथा’ उनका पहला काव्य संग्रह है और वे वर्तमान में रेनबो विद्यालय में अध्यापिका के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि इस संग्रह में रामायण और महाभारत के ऐसे पात्रों को चुना गया है, जिनके त्याग, पीड़ा और मानसिक संघर्ष पर इतिहास में अपेक्षाकृत कम चर्चा हुई है। विशेष रूप से मां उर्मिला के 14 वर्षों के मौन त्याग, भरत के अंतर्मन के संताप और द्रौपदी की व्यथा को कविताओं के माध्यम से समाज के सामने लाने का प्रयास किया गया है।
कवियत्री ने द्रौपदी को अपना प्रिय पात्र बताते हुए कहा कि समाज अक्सर स्त्री के चरित्र पर उंगली उठाता है, लेकिन उसकी पीड़ा और अपमान को नहीं समझता। उन्होंने द्रौपदी के जीवन संघर्ष और सामाजिक अपमान को संवेदनशील शब्दों में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। डॉ. रश्मि शर्मा ने आशा जताई कि उनका यह प्रथम काव्य संग्रह पाठकों को भावनात्मक रूप से जोड़ पाएगा और उन्होंने पाठकों से रचनात्मक सुझाव देने की अपील भी की, ताकि भविष्य में और बेहतर रचनाएं प्रस्तुत की जा सकें।



